त्रयोदशी श्राद्ध 2026 | छोटे पितर, बड़ी सीख | गीता 2.20
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आज गुरुवार, 8 अक्टूबर — त्रयोदशी श्राद्ध, पितृ पक्ष का तेरहवां दिन। परंपरा कहती है — त्रयोदशी श्राद्ध उन पितरों के लिए होता है जो त्रयोदशी तिथि को गए। लोक-परंपरा में यह दिन छोटी आयु में गए प्रियजनों के कोमल स्मरण (बाल श्राद्ध) से भी जुड़ा है। यह दिन दुःख का नहीं — प्रेम की निरंतरता का है। प्रेम समय से नहीं बंधता। गीता (2.20) में श्रीकृष्ण आत्मा को अजन्मा, नित्य और शाश्वत कहते हैं — "न जायते म्रियते वा कदाचिन्"। शरीर बदलता है, पर आत्मा और प्रेम का बंधन बना रहता है। आज क्या करें: अपराह्न काल में काले तिल से तर्पण करें, पितरों के नाम एक दीया जलाएं, बच्चों के साथ परिवार की कोई मीठी याद साझा करें, और यथाशक्ति अन्नदान करें। तिथि का समय स्थान अनुसार बदलता है — अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें। 🙏 रोज़ ऐसी ही भक्ति भरी कहानियाँ पाने के लिए जुड़िए: 🌐 https://bhaktiverse.com ▶️ https://www.youtube.com/@MyBhaktiVerse
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